किशोरावस्था के दौरान अधिकत्तर पाया जाने वाला रोग “एपेंडिसाइटिस”

एपेंडिसाइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन यह बचपन और किशोरावस्था के दौरान अधिकत्तर पाया जाता है।

“एपेंडिसाइटिस” (उपांत्र शोथ) एपेंडिक्स की सूजन की अवस्था होती है। एपेंडिक्स एक छोटी सी ट्यूब की तरह का अंग होता है, जो कि बड़ी आंत से जुड़ा होता है। यह अवस्था एपेंडिक्स के अंदर रुकावट के कारण पैदा होती है। यह रुकावट, दबाव और सूजन में बढ़ोत्तरी को विकसित करती है।

इसका मुख्य लक्षण पेट में दर्द होना है। यह दर्द शुरू में बेहद मंद होता है, लेकिन यह दर्द समय के साथ अधिक खराब अवस्था तक पहुँच जाता है।

इसके अन्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल है:

  • पेट में सूजन।
  • भूख में कमी।
  • मतली और उल्टी।
  • कब्ज या दस्त।
  • गैस पारित करने में असमर्थता।
  • कम बुखार होना।

एपेंडिसाइटिस होने का कारण

एपेंडिसाइटिस होने के सटीक कारण अभी ज्ञात नहीं है। हालांकि, इसका कारण एपेंडिक्स के अंदर रुकावट के साथ जुड़ा होता है। इस रुकावट का कारण मल के छोटे-छोटे टुकड़े, शरीर के अंदर और बाहर से प्राप्त हुए सूक्ष्मकण या संक्रमण हो सकते है।

निदान में संपूर्ण शारीरिक परीक्षण और सावधानी से लक्षणों का अध्ययन शामिल हैं। यदि रोग की जानकारी स्पष्ट नहीं है, तो प्रयोगशाला परीक्षण और अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन भी किया जा सकता है।

इसे रोकने के उपाय

  • आमतौर पर एपेंडिक्स के उपचार में एपेंडिक्स को सर्जिकल/शल्य चिकित्सा द्वारा हटाया जाना शामिल हैं। इस प्रक्रिया को उपांत्र-उच्छेदन या एपेंडेक्टॉमी के रूप में जाना जाता है।
  • एपेंडिक्स को लेप्रोस्कोपिक (कीहोल) सर्जरी के उपयोग द्वारा हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया में, शल्य चिकित्सक एक पतले उपकरण (लैप्रोस्कोप) का उपयोग करता है, जो कि पेट में छोटे चीरे (काटकर) के माध्यम से डाला जाता है।
  • पेट काटकर सर्जिकल/शल्य चिकित्सा करने की आवश्यकता अब समाप्त हो गयी है।