उत्तराखंड में डिजिटल साक्षरता के प्रसार की जरूरत

ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आनलाइन कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर

  • शहरी क्षेत्रों में सेवाओं को आनलाइन करने का फायदा भी मिल रहा है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इसमें अभी दिक्कतें महसूस हो रही है।
  • दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता के प्रसार की जरूरत है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आनलाइन कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कामन सर्विस सेंटर अधिक सफल हो रहे हैं। यह समस्या केंद्र सरकार ने भी समझी थी। 
  • इसके लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान शुरू किया गया। प्रदेश में इस अभियान के तहत 5.06 लाख ग्रामीण व्यक्तियों को डिजिटल साक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • अभी 4.17 लाख ग्रामीणों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनके सापेक्ष 3.26 लाख को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब इन्हें प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे।
  • इसके अलावा अब विभाग इस अभियान के तहत नए पंजीकरण के साथ ही पुराने पंजीकृत ग्रामीणों को डिजिटल शिक्षित करने में जुटा हुआ है।

5.06 ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर करने की काम शुरू

  • प्रदेश सरकार लगातार समस्त सरकारी सेवाओं और योजनाओं को आनलाइन करने के साथ ही अब ग्रामीणों को भी डिजिटल साक्षर करने की तैयारी में जुट गई है।
  • इस कड़ी में अब कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से 5.06 ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर करने की काम शुरू हो गया है।
  • सरकार का मकसद 2022 तक लक्ष्य के मुताबिक सभी ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर करना है।
  • प्रदेश में इस समय नागरिकों को ई-डिस्ट्रिक्ट योजना के साथ केंद्र की अन्य योजनाओं की सुविधा सीएससी के जरिये दी जा रही है।

इन सेवाओं में बैंकिंग सेवाएं, शिक्षण संबंधित सेवाएं, चिकित्सा सेवाएं, बीमा सेवाएं, कौशल विकास, रोजगार आवेदन, प्रशिक्षण कोर्स, ट्रेवल बुकिंग, प्रधान जन आरोग्य के अंतर्गत गोल्डन कार्ड बनाना, प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के लिए पंजीकरण सुविधा, प्रधानमंत्री किसान मानधन को पंजीकरण सुविधा, प्रधानमंत्री किसान निधि को पंजीकरण, स्वरोजगार एवं छोटे व्यापारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन स्कीम के तहत पंजीकरण सुविधा व आर्थिक गणना आदि शामिल हैं।