उत्तराखंड कोविड-19 के खिलाफ विश्वव्यापी जंग जारी,IIM एमबीए छात्रों ने पेसिव इन्फ्रारेड सेंसर डिवाइस तैयार की

पेसिव इन्फ्रारेड सेंसर डिवाइस तैयार

कोविड-19 के खिलाफ विश्वव्यापी जंग जारी है और इस लड़ाई में सबसे कारगर हथियार दो गज की दूरी को माना जा रहा है। इसी शारीरिक दूरी के मानक को सुनिश्चित कराने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आइआइएम) काशीपुर के एमबीए छात्रों ने पेसिव इन्फ्रारेड सेंसर डिवाइस तैयार की है। यह डिवाइस किसी व्यक्ति से दूरी दो गज से कम होने पर अलर्ट कर देगी। साथ ही उस व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बताएगी। आइआइटी रूड़की अब इसे पेटेंट भी कराने की तैयारी कर रही है।

  • हाल में डिजाइन इनोवेशन सेंटर (डीआइसी) आइआइटी रूड़की द्वारा इनोवेशन चैलेंज कोविड स्केप प्रतियोगिता आयोजित की गई थी।
  • जिसमें कोविड से बचाव को लेकर इनोवेटिव आइडिया मांगे गए थे। दिल्ली निवासी गौरव कुमार आइआइएम काशीपुर की  देहरादून ब्रांच (फैकल्टी) से एमबीए कर रहे हैं और टीएचडीसी में बतौर जनसंपर्क अधिकारी कार्यरत हैं।
  • गौरव ने इस प्रतियोगिता के लिए एमबीए के ही पांच दोस्तों के साथ आइआइएम की ओर से टीम तैयार की। प्रतियोगिता में इन्फ्रारेड डिवाइस के लिए काशीपुर आइआइएम की टीम को दूसरा स्थान मिला।

टीम में शामिल सदस्य टीएचडीसी में हैं कार्यरत

  • इस आइडिया को मूर्त रूप देने वाले गौरव के अलावा पांच अन्य दोस्त भी देहरादून ब्रांच से एमबीए कर रहे हैं।  साथ ही सभी टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन लि. (टीएचडीसी) में कार्यरत भी हैं।
  • गौरव के अलावा राहुल जोशी, सिद्धार्थ कौशिक, तनुज राणा, और अपूर्व कुमार टीएचडीसी में ही उप प्रबंधक पद पर कार्यरत हैं।
  • गौरव का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को काशीरथी नाम दिया गया। इस पर काम करने में डीआइसी काशीपुर की अस्टिटेंट प्रोफेसर कुमकुम भारती व  संजय कुमार प्रोजेक्ट एसोसिएट तथा  डीआइसी रूड़की के प्रो. संजय मन्हास का काफी सहयोग रहा।  

ऐसे काम करेगा डिवाइस

कलाई घड़ी के आकार का बना यह डिवाइस बहुत हल्का उपकरण है और मानवीय उपस्थिति के प्रति संवेदनशील है। इसमें पीआई सेंसर यानी पेसिव इन्फ्रारेड सेंसर का इस्तेमाल हुआ है। यह डिवाइस निर्धारित दूरी के अंतर्गत मानवीय उपस्थिति पाते ही अलार्म के जरिये अलर्ट कर देती है। इन्फ्रारेड तकनीक के चलते सामने वाले व्यक्ति के शरीर का तापमान भी डिवाइस में डिस्प्ले हो जाएगा।

आइआइटी रुड़की करेगा पेटेंट

  • आइआइएम के छात्रों की इस डिवाइस आइआइटी रूड़की में हुई  प्रतियोगिता में काफी सराहा गया। आइआइटी ने ही डिवाइस को तैयार करने के लिए छात्रों को ग्रांट भी दी।
  • दिसंबर अंत तक आइआइएम की टीम इस डिवाइस में एडवांसमेंट का काम आइआइटी रुड़की को सौंप देगी। इसके बाद आइआइटी पेटेंट कराएगी।

गौरव कुमार का कहना है कि हमारा फोकस कोविड-19 से बचाव के लिए शारीरिक दूरी पर ध्यान रखने वाले डिवाइस पर था। कोरोना में दो गज दूरी के लिए जागरूक तो किया जा रहा है लेकिन व्यस्त जीवन में यह सीख लोग भूल जा रहे हैं। ऐसे में यह डिवाइस काफी मददगार साबित होगी। आइआइएम की डीआइसी प्रो. कुमकुम ने कहा कि टीम काशीरथी पिछले छह माह से इस डिवाइस को बनाने में लगी थी। इसका लैब टेस्ट भी किया जा चुका है। यह डिवाइस हाथ में घड़ी की तरह आसानी से पहना जा सकता है। इसके लिए आइआइटी रुड़की से फंडिग भी मिली है।