महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर जीवन चंद्र जोशी का संदेश

महात्मा गांधी के 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर हस्तशिल्पी जीवन जोशी के द्वारा गांधीजी के चरखे को काष्ठ शिल्प के माध्यम से बनाकर संदेश देने का प्रयास किया है ।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार से सीनियर फैलोशिप प्राप्त कर चुके जीवन चंद्र जोशी काष्ठ कला के क्षेत्र में विगत 20 वर्षों से सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं 3 वर्ष की उम्र से ही दिव्यांग पोलियो ग्रस्त होने के बावजूद जीवन चंद्र जोशी ने अपनी कला साधना को नहीं छोड़ा जिसका सुपरिणाम है कि, आज भी क्षेत्र के विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों , युवा कलाकारों को न केवल काष्ठ कला से जोड़ रहे हैं बल्कि उनमें विभिन्न कौशल भी विकसित कर रहे हैं।

जीवन चंद्र जोशी के द्वारा चीड़ के पेड़ की छाल बकेट के माध्यम से गांधीजी के चरखे को प्रतीक स्वरूप बनाकर पर्यावरण के संरक्षण का भी संदेश देने का प्रयास किया है क्योंकि चीड़ के पेड़ की छाल बगेट पूरी तरह इको फ्रेंडली होता है।

अपनी इस नायाब कलाकृति को युवा पीढ़ी तथा अन्य गुमनाम कलाकारों में भी हस्तांतरित कर रहे हैं।
प्रतिवर्ष उनके द्वारा बच्चों की कार्यशाला आयोजित की जाती है उस के माध्यम से वे बाल कलाकारों में भी काष्ठ कला के इस हुनर को करने का प्रयास कर रहे हैं।

काष्ठशिल्प की साधना कर रहे जीवन जीवन चंद्र जोशी