उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में कोरोना वैक्सीन पहुंचाने में ड्रोन की मदद

ड्रोन की वैक्सीन पहुंचाने में अहम भूमिका

  • उत्तराखंड राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में कोरोना वैक्सीन पहुंचाने में ड्रोन की मदद ली जा सकती है। आईटीडीए ने इसके लिए डीजीसीएस से ड्रोन संचालन की अनुमति मांगी है।
  • वैक्सीन के लिए कोल्ड चेन की जरूरत को देखते हुए ड्रोन दूरस्थ क्षेत्रों में वैक्सीन पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

उत्तराखंड में 20 लाख लोगों को वैक्सीन दी जानी है

  • वैक्सीन की तैयारी अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही अब सरकार का ध्यान वैक्सीन लोगों तक पहुंचाने को नेटवर्क बनाने पर केंद्रित हो गया है।
  • उत्तराखंड में प्रथम चरण में 20 लाख लोगों को वैक्सीन दी जानी है।
  • वैक्सीन के लिए कोल्ड चेन जरूरी मानी जा रही है। ऐसे में राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक वैक्सीन पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सरकार ने इसके लिए ड्रोन के इस्तेमाल की संभावनाएं टटोलनी शुरू कर दी हैं।
  • ड्रोन एक बार में औसतन 20 मिनट उड़ान भर सकता है। इतने में पहाड़ में 15 से 18 किलोमीटर की हवाई दूरी तय हो सकती है। इंजन क्षमता के अनुसार, इसमें वजन भी बढ़ाया जा सकता है। 

पूर्व के दो प्रयोग सफल

  • राज्य में ड्रोन तकनीकी के लिए आईटीडीए नोडल एजेंसी की भूमिका निभाता है। इस के अधीन दो वर्ष से सुसज्जित ड्रोन लैब काम कर रही है।
  • एजेंसी ड्रोन से मेडिकल सैंपल भेजने के दो प्रयोग सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी है। अब वैक्सीन पहुंचाने में भी यह विधि प्रयोग में लाई जा सकती है। 
  • राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए ड्रोन इस्तेमाल करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इसके लिए हमें पहले डीजीसीए की अनुमति चाहिए।
  • हमारा ड्रोन संचालित करने वाली कंपनियों के साथ अनुबंध है, जो इस काम को पूरी दक्षता के साथ कर सकती हैं।
  • पहाड़ों में सड़क मार्ग के जरिए वैक्सीन भेजने के बजाय हवाई मार्ग से वैक्सीन उपलब्ध कराना ज्यादा कारगर हो सकता है।