उत्तराखंड की संस्कृति को जीवंत कर रहे हैं कलाकार मुकुल बडोनी

मुकुल बडोनी की कलाकृतियां बेजान दीवारों में जान फूंक रहे हैं

  • हर व्यक्ति के अंदर कोई न कोई एक हुनर होता है, कोई उस हुनर को नहीं पहचान पाते हैं, जो पहचानते हैं वे उस हुनर को तराशने में जुट जाते हैं। ऐसे ही उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के कांदला बडेथी गांव निवासी मुकुल बडोनी अपने हुनर को तलाशने में जुटे हुए हैं। वे अपनी तूलिका से बेजान दीवारों में जान फूंक रहे हैं। उनका हुनर स्थानीय लोगों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
  • नगरपालिका मुनिकीरेती अंतर्गत चौदबीघा में आर्ट कलाकार मुकुल पहाड़ की संस्कृति को जीवंत कर रहे हैं। वे अपने कला के माध्यम से पहाड़ की भेष भूषा, वाद्य यंत्र, आभूषण और धामों की कलाकृति एक सूत्र में फिरोह रहे हैं। जो दर्शकों का आर्कषण का केंद्र बना हुआ है।
  • आर्ट कलाकार मुकुल ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पेंटिंग करने को बहुत शौक रहा है। उन्होंने उत्तरकाशी जिले के अलावा टिहरी, पौड़ी और देहरादून में भी विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बनाई ही। हाल ही में उन्होंने मुनिकीरेती में कुंभ मेले के दौरान आस्था पथ की दीवारों पर विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां बनाई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में वे परमार्थ निकेतन आश्रम की ओर से तीर्थनगरी में कलाकृतियां बना रहे हैं।
  • आश्रम की ओर से जिन विद्यालयों को गोद लिया गया है वे उन विद्यालयों की दिवारों पर जल बचाओ, जीवन बचाओ और पर्यावरण बचाओं विषय पर कलाकृतियां बना रहे हैं।
  • चौदहबीघा में उनके एक मित्र का दगड्या नाम से एक कैफे संचालित है। जिसमें उन्होंने उपहार स्वरुप दीवार पर पहाड़ की संस्कृति से रुबरु होने के लिए इस कलाकृति को तैयार किया है।